डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) मामले की सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव नतीजों में तब तक दखल नहीं दिया जा सकता, जब तक कि जीत का अंतर, सूची से बाहर किए गए वोटों की संख्या से कम न हो।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची और सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने सुनवाई के दौरान भारत निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि बंगाल के मतदाता अलग-अलग संवैधानिक संस्थाओं के बीच पिस रहे हैं।

चुनाव आयोग ने दी थी ये दलील

दरअसल, जस्टिस बागची ने यह टिप्पणी तब की जब चुनाव आयोग ने दलील दी कि न्यायिक अधिकारियों ने तार्किक विसंगति के 47 फीसदी मामलों को खारिज कर दिया है, ये वे अधिकारी थे जिन्होंने चुनाव आयोग द्वारा जारी नोटिसों पर फैसला सुनाया था। कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि चुनाव आयोग ने ही पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान संदिग्ध मतदाताओं की एक तार्किक विसंगति सूची बनाई थी।